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यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क (UCCN)(UNESCO Creative Cities Network (UCCN)

 

*यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क (UCCN)*

(UNESCO Creative Cities Network (UCCN)




वर्ल्ड सिटीज़ डे (31 अक्टूबर)के अवसर पर केरल के *कोझिकोड को ‘साहित्य‘* और मध्य प्रदेश के *ग्वालियर को ‘संगीत‘* श्रेणी के अंतर्गत यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क (UCCN) में शामिल किया गया है।


UCCN की इस सूची में 55 नए शहरों को शामिल किया गया है जिनमें कोझिकोड और ग्वालियर भी शामिल हैं। इन रचनात्मक शहरों को जुलाई, 2024 में आयोजित होने वाले UCCN के वार्षिक सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा, जिसकी थीम *‘ब्रिंगिंग यूथ टू द टेबल फॉर द नेक्स्ट डिकेड’* होगी।


UCCN की स्थापना वर्ष 2004 में ‘रचनात्मकता’ के माध्यम से टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा देने वाले हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। ध्यातव्य है कि SDG-11 भी टिकाऊ शहरी और सामुदायिक विकास से संबंधित है। 


UCCN में शहरों को सात रचनात्मक श्रेणियों- शिल्प एवं लोक कला, मीडिया, फिल्म, डिज़ाइन, पाककला, साहित्य और संगीत के अंतर्गत शामिल किया जाता है।


इससे पहले भारत के  जयपुर और श्रीनगर (शिल्प और लोक कला), वाराणसी और चेन्नई (संगीत), मुंबई (फिल्म) और हैदराबाद (पाककला) को इस नेटवर्क में शामिल किया जा चुका है।

बैराठ सभ्यता (Bairath Civilization) और गणेश्वर सभ्यता(Ganeshwar Civilization)

 

 बैराठ सभ्यता

(Bairath Civilization)




  • जिला - जयपुर


  • नदी - बाणगंगा


  • समय - 600 ईसा पुर्व से 1 ईस्वी


  • काल - लौह युगीन


  • खोजकत्र्ता/ उत्खनन कर्ता - 1935 - 36 दयाराम साहनी


  • प्रमुख स्थल - बीजक की पहाड़ी, भीम की डुंगरी, महादेव जी डुंगरी


विशेषता:-


1. महाजन पद संस्कृति के साक्ष्य(600 ईसा पुर्व से 322 ईसा पुर्व तक)


  • मत्स्य जनपद की राजधानी - विराटनगर


  • मत्स्य जनपद - जयपुर, अलवर, भरतपुर


  • विराटनगर - बैराठ का प्राचीन नाम है।


2. महाभारत संस्कृति के साक्ष्य


👉पाण्डुओं ने अपने 1 वर्ष का अज्ञातवास विराटनगर के राजा विराट के यहां व्यतित किया था।


3. बौद्धधर्म के साक्ष्य मिले हैं।


  • बैराठ से हमें एक गोलाकार बौद्ध मठ मिला है।


4. मौर्य संस्कृति के साक्ष्य मिले हैं।


  • मौर्य समाज - 322 ईसा पुर्व से 184 ईसा पुर्व


  • सम्राट अशोक का भाब्रु शिलालेख बैराठ से मिला है।


  • भाब्रु शिलालेख की खोज - 1837 कैप्टन बर्ट


  • इसकी भाषा - प्राकृत भाषा


  • लिपी - ब्राह्मणी


  • वर्तमान में भाब्रु शिलालेख कोलकत्ता के संग्रहालय में सुरक्षित है।


5. हिन्द - युनानी संस्कृति के साक्ष्य मिले है।


  • यहां से 36 चांदी के सिक्के प्राप्त हुए हैं 36 में से 28 सिक्के हिन्द - युनानी राजाओं के है। 28 में से 16 सिक्के मिनेण्डर राजा(प्रसिद्ध हिन्द - युनानी राजा) के मिले हैं।


  • शेष 8 सिक्के प्राचीन भारत के सिक्के आहत(पंचमार्क) है।





गणेश्वर सभ्यता

(Ganeshwar Civilization)




  • जिला - सीकर, नीम का थाना - सहसील
  • नदी - कांतली
  • समय - 2800 ईसा पुर्व

  • काल - ताम्रपाषाण काल (ताम्रपाषाण युगीन सभ्यता की जननी)
  • खोजकत्र्ता/उत्खनन कत्र्ता - 1977 आर. सी.(रत्न चन्द्र) अग्रवाल


विशेषताएं:-


1. मछली पकड़ने का कांटा मिला है।


2. ताम्र निर्मित कुल्हाड़ी मिली है।


3. शुद्ध तांबा निर्मित तीर, भाले, तलवार, बर्तन, आभुषण, सुईयां मिले हैं।



इंदिरा गांधी(Indira Gandhi)

 इंदिरा गांधी

(Indira Gandhi)




 


इंदिरा गांधी (जन्म- 19 नवंबर 1917 निधन- 31 अक्टूबर 1984)


➡️शिक्षा प्राप्त की - स्विस स्कूल और ऑक्सफोर्ड के समरविले कॉलेज से

(विश्व स्तर पर कई विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि के साथ ही प्रभावशाली अकादमिक पृष्ठभूमि के साथ कोलंबिया विश्वविद्यालय से प्रशस्ति पत्र धारक ।)


भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रियता:-

श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने बाल्यकाल में ही बाल ‘चरखा संघ’ की स्थापना की। 

➡️1930 में असहयोग आंदोलन के दौरान कांग्रेस पार्टी की मदद करने के लिए बच्चों के वानर सेना’की स्थापना की। 

➡️सितंबर 1942 का समय जेल में बीता तथा महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में 1947 के दंगा  प्रभावित दिल्ली के क्षेत्रों में काम किया।


राजनीतिक जीवन:-

➡️1955 -   कांग्रेस कार्य समिति और पार्टी के केंद्रीय चुनाव की सदस्य। 

➡️1958 -   कांग्रेस के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की सदस्य के रूप में नियुक्ति। 

➡️1956 -   अध्यक्ष - राष्ट्रीय एकता परिषद ,अखिल भारतीय युवा कांग्रेस एवं महिला विभाग (A.I.C.C.)

➡️1959 -1960, 1978 -  अध्यक्ष - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 

➡️1964 से 1966 -   सूचना और प्रसारण मंत्री ।

➡️जनवरी 1966 से मार्च 1977-  भारत के प्रधानमंत्री पद पर ।

➡️(इंदिरा गांधी भारत के प्रधानमंत्री पद पर सबसे लम्बे समय तक कार्यरत रहने वाली दूसरी प्रधानमंत्री)।

➡️5 सितंबर,1967 से 14 फरवरी,1969 - विदेश मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

➡️जून 1970 से नवंबर 1973 तक गृह मंत्रालय, 1972 से मार्च 1977 तक अंतरिक्ष मंत्री,जनवरी 1980 से योजना आयोग अध्यक्ष तथा 14 जनवरी 1980 में फिर से प्रधानमंत्री कार्यालय का पदभार ग्रहण किया।


उपलब्धियां:-

  • 1953 में मदर्स अवार्ड, 1971 में अर्जेंटीना की सोसाइटी ऑफ़ एनिमल्स की सुरक्षा हेतु डिप्लोमा ऑफ़ ऑनर एवं 1972 में भारत रत्न तथा  बांग्लादेश मुक्ति के लिए मैक्सिकन अकादमी पुरस्कार।


✅चर्चित कदम:-

  • आपातकाल (1975-1977)
  • ऑपरेशन ब्लू स्टार (1981-82)

मेजर शैतान सिंह भाटी

 मेजर शैतान सिंह भाटी 





 ➡️मेजर शैतान सिंह भाटी का जन्म 1 दिसंबर, 1924 को जोधपुर, राजस्थान में एक सैन्य परिवार में हुआ था।

➡️एक सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह भाटी के पुत्र, मेजर शैतान सिंह को 01 अगस्त 1949 को कुमाऊं रेजिमेंट में नियुक्त किया गया था।

➡️1962 के भारत-चीन युद्ध ने मेजर शैतान सिंह को लद्दाख के चुशूल सेक्टर में अपनी वीरता दिखाने का मौका दिया था।

➡️चुशूल सेक्टर जो सीमा से 15 मील की दूरी पर था, चीन के साथ अक्साई चीन के सीमा विवाद के संदर्भ में बहुत महत्व रखता था।

➡️युद्ध के दौरान, मेजर शैतान सिंह की इकाई को उस सेक्टर में रेजांग ला पोस्ट पर 17000 फीट की ऊंचाई पर तैनात किया गया था।

➡️चुशूल घाटी में एक हवाई पट्टी थी जो क्षेत्र में जारी भारतीय वायु सेना के संचालन और लद्दाख क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण थी।

➡️लगभग 5000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पहाड़ी दर्रा 3 प्लाटून द्वारा संरक्षित था जिसमें कुल 123 भारतीय सेना के जवान थे।

➡️एक पर्वत शिखा के बीच में आ जाने के कारण, कंपनी को भारतीय आर्टिलरी का समर्थन नहीं मिल सका।

➡️जब चीनी सेना ने सुबह-सुबह कंपनी पर हमला किया, तो सैनिकों ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी और अपने दुश्मन सैनिकों को धुल चटाई। 

➡️मेजर शैतान सिंह लड़ते रहे और एक दस्ते से दूसरे दस्ते में जा, अपनी जान की परवाह किये बिना सैनिकों का मनोबल बढ़ाते रहे। 

➡️इस बहादुर सैनिक की एक प्रतिमा उनके पैतृक शहर जोधपुर में एक चौक पर रखी गई है।

➡️मेजर को परमवीर चक्र के साथ नवाज़ा गया तथा साथी जवानों को 5 वीर चक्र और 4 सेना पदक भी दिए गए।

➡️उनके सम्मान में उनके पैतृक गांव का नाम बदलकर शैतान सिंह नगर रखा गया।

जोधपुर स्थापना दिवस (Jodhpur Foundation Day)


जोधपुर स्थापना दिवस

(Jodhpur Foundation Day)




 ​​"पधारो म्हारे देश"


सूर्यनगरी जोधपुर रा स्थापना दिवस री थां सगळा ने घणी-घणी शुभकामनावां सा। 

जोधपुर रो समृद्ध इतिहास अर मीठी बोली घणी निराळी है सा।


राजस्थान के जोधपुर जिले की 12 मई,1459 को स्थापना हुई थी। जोधपुर शहर की नींव राव जोधा द्वारा रखी गयी थी । जोधपुर ऐतिहासिक रजवाड़े की राजधानी भी हुआ करता था।


इसी दिन को जोधपुर के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। जोधपुर शहर थार के रेगिस्तान के बीच बसा एक लोकप्रिय शहर है जो अपने पुराने दुर्ग एवं अपने पर्यटक स्थलों के लिए जाना जाता है। जोधपुर के मेहरानगढ़ किले के चारों तरफ बने हजारों नीले मकानों के कारण जोधपुर को नीली नगरी भी कहा जाता है। जोधपुर की उत्कृष्ट हस्तकलाएं, लोक नृत्य, संगीत, पहनावा देखकर आपका मंत्र मुग्ध हो जाएंगे।


पढ़ते हैं जोधपुर और जोधपुर शहर से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में- 


जोधपुर आज, 12 मई, 2021 को अपना 563वाँ स्थापना दिवस मना रहा है।


जोधपुर स्थापना दिवस का समारोह शहर के सभी प्रमुख इलाको में पारंपरिक कलाकारों द्वारा वाद्य और लोक नृत्य प्रस्तुत करके किया जाता है।  विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन, मारवाड़ रत्न और अन्य पुरस्कार वितरण कर के भी जोधपुर शहर में यह दिवस मनाया जाता है।


जब 1459 में राठौड़ वंश के राजपूत शासक राव जोधा ने जोधपुर की नींव रखी थी, वह उस समय मंडोर के तत्कालीन शासक भी थे, उन्होंने जोधपुर शहर के आसपास के क्षेत्रों पर विजय प्राप्त कर के जोधपुर एवं मारवाड़ राज्य की स्थापना की।


पचपदरा में रिफाइनरी की स्थापना के बाद जोधपुर अपनी अर्थव्यवस्था एक बड़े शहर की गति से बढ़ाएगा क्योंकि रिफाइनरी जोधपुर से केवल 60 किलोमीटर दूर है और इससे निकलने वाले by-प्रोडक्ट्स की संख्या 120 से अधिक होगी जो निकायों के लिए एक तोहफे जैसी होगी । यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) द्वारा बनाई गई है। 


शहर और यहाँ के लोग आधुनिकीकरण की गति के साथ बहुत अच्छी तरह से बढ़ रहे हैं, अपने इतिहास, संस्कृति और मूल्यों को अपने दिल के करीब रखते हुए एक ही समय में बरकरार रख कर यह शहर आगे की दिशा चुन रहा है । कुल मिलाकर जोधपुर शहर और यहां के लोगों के पास 563 वें जोधपुर स्थापन दिवस के रूप में मनाने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण शहर में किसी भी उत्सव को मानने पर रोक लगाई गई है। 


जोधपुर में "अतिथि देवो भवः" की भावनाओं के साथ सभी का "पधारो म्हारे देश" बोलकर स्वागत किया जाता है।

महाराणा प्रताप (Maharana Pratap)

 

महाराणा प्रताप 

(Maharana Pratap)



महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमंद) में महाराजा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कंवर के घर में हुआ था। 

महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। 

इनके कुल देवता एकलिंग महादेव हैं।

इन्हें बचपन और युवावस्था में कीका नाम से भी पुकारा जाता था। यह नाम इन्हें भीलों से मिला था ।

भीलों की बोली में कीका का अर्थ 'बेटा' होता है ।


महाराणा प्रताप के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था, जिसका नाम 'चेतक' था। 

महाराणा प्रताप की वीरता की कहानियों में चेतक का एक विशेष स्थान है। 


चेतक की फुर्ती, रफ्तार और बहादुरी की कई लड़ाइयाँ जीतने में महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।


एक पहाड़ी पर महाराणा प्रताप का दर्शनीय स्मारक स्थित है। 


यहाँ मुख्य रूप से रक्त तलाई, शाहीबाग, प्रताप गुफा, घोड़े चेतक की समाधि एवं ऊंची पहाड़ी पर महाराणा प्रताप के दर्शनीय स्थल हैं।


मेवाड़ की शौर्य-भूमि धन्य है जहां वीरता और दृढ़ प्रण वाले प्रताप का जन्म हुआ। जिन्होंने इतिहास में अपना नाम अजर-अमर कर दिया। उन्होंने धर्म एवं स्वाधीनता के लिए अपना बलिदान दिया इनकी वीरता की कथा से भारत की भूमि गौरवान्वित है। 


महाराणा प्रताप और मुगल बादशाह अकबर के बीच 18 जून,1576 में लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध काफी चर्चित है, क्योंकि अकबर और महाराणा प्रताप के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था।

इस युद्ध के बाद मेवाड़, चित्तौड़, गोगुंदा, कुंभलगढ़ और उदयपुर पर मुगलों का कब्जा हो गया।


1597 ई. को महाराणा प्रताप का देहांत हो गया।


30 वर्षों के संघर्ष और युद्ध के बाद भी अकबर, महाराणा प्रताप को न तो बंदी बना सका और न ही अपने अधीन कर सका। 


महान वो होता है जो अपने देश, जाति, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का समझौता न करे और लगातार संघर्ष करता रहे।

डॉ॰ भीमराव साहेब अम्बेडकर(Dr. Bhimrao Saheb Ambedkar)

  डॉ॰ भीमराव साहेब अम्बेडकर

(Dr. Bhimrao Saheb Ambedkar)

भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाजसेवक )




जन्म: - 14 अप्रैल, 1891 (महू, मध्य प्रांत ब्रिटिश भारत, मध्यप्रदेश)

निधन: -  6 दिसंबर 1956 नई दिल्ली, भारत।


भीमराव रामजी आंबेडकर या भीमराव अम्बेडकर, भारत रत्न (1990): -

"एक इंसान नहीं बल्कि वह शख्सियत जो बचपन में लगभग असम्भव सी परिस्थितियों से लड़कर जीवन के अंत तक जाता है - जाओ दुनिया का सबसे बड़ा संविधान रच दिया।"

• बचपन का नाम - भीमराव सतपाल।

 ➢ बाद में अपने एक ब्राह्मण शिक्षक महादेव अंबेडकर के सुझाव व स्नेह पर अपने नाम में अंबेडकर लगाना शुरू किया जो उनके गाँव के नाम अम्बेदन पर आधारित था।


 उपनाम: -   बाबासाहेब आंबेडकर, आधुनिक भारत के मनु और भारतीय संविधान के पिता।


सफलता का रहस्य: -

• अनुचित और अहितकर व्यवहार के प्रति विद्रोही रूख, प्रखर स्मरण शक्ति, बुद्धिमत्ता, ईमानदारी एवं सच व अडिग नियमितता के बीच कोई समझौता नहीं।


शिक्षा :-

• आंबेडकर ने सातारा शहर में स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय (अब प्रतापसिंह हाईस्कूल) में 7 नवंबर 1900 को अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश लिया। इसी दिन से उनके शैक्षिक जीवन का आरम्भ हुआ था, इसलिए 7 नवंबर को महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

• बॉम्बे विश्वविद्यालय - कला स्नातक, (अर्थशास्त्र और राजनिति विज्ञान), (1912) 

• कोलंबिया विश्वविद्यालय – (एम.ए. पीएच.डी. एल.एल.बी,) 

• लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एमएस सी, डीएस. सी) तथा स्नातक (बेरिस्टर-एट-लॉ)


सामाजिक संगठन:-

• बहिष्कृत हितकारिणी सभा एवं डिप्रेस्ड क्लासेस एजुकेशन सोसायटी।

• पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी।


राजनीतिक दल :-

स्वतंत्र लेबर पार्टी 

• शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन भारतीय रिपब्लिक पार्टी


प्रमुख पुस्तक :-

• एनहाइलेशन ऑफ़ कास्ट


राजनीतिक उपलब्धियां व पद :-

बॉम्बे विधान परिषद् सदस्य – 1926-36

• बॉम्बे विधान सभा सदस्य – 1937-42

• श्रम मंत्री, वायसराय, कार्य-परिषद- 1942 – 1946

• भारतीय संविधान सभा की मसौदा समिती के अध्यक्ष : 29 अगस्त 1947 – 24 जनवरी 1950

• भारत के प्रथम क़ानून एवं न्यायमंत्री - 15 अगस्त 1947 – सितंबर 1951

• राज्य सभा, सदस्य, ( बॉम्बे ) - 3 अप्रैल 1952 – 6 दिसम्बर 1956


सम्मान :-

• बोधिसत्व (1956)

• भारत रत्न (1990)

• प्रथम कोलंबियन अ हेड ऑफ द इयर टाईम (2004)

• द ग्रेटेस्ट इंडियन (2012)


➢समाधी स्थल - चैत्य भूमि, मुंबई (महाराष्ट्र)

गणेश्वर सभ्यता(Ganeshwar Civilization)

 गणेश्वर सभ्यता

(Ganeshwar Civilization)




1. जिला - सीकर, नीम का थाना- तहसील 


2. नदी - कांतली


3. समय - 2800 ईसा पुर्व


4. काल - ताम्रपाषाण काल (ताम्रपाषाण युगीन सभ्यता की जननी)


5. खोजकत्र्ता/उत्खनन कत्र्ता - 1977 आर. सी.(रत्न चन्द्र) अग्रवाल


विशेषताएं:-


1. मछली पकड़ने का कांटा मिला है।


2. ताम्र निर्मित कुल्हाड़ी मिली है।


3. शुद्ध तांबे निर्मित तीर, भाले, तलवार, बर्तन, आभुषण, सुईयां मिले हैं।





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राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं (Important Events of National Movement)


राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं

(Important Events of National Movement)



►1904 ➖ भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित


►1905 ➖ बंगाल का विभाजन


►1906 ➖ मुस्लिम लीग की स्थापना


►1907 ➖ सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट


►1909 ➖ मार्ले-मिंटो सुधार




►1911 ➖ ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार


►1916 ➖ होमरूल लीग का निर्माण


►1916 ➖ मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)


►1917 ➖ महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन


►1919 ➖ रौलेट अधिनियम




►1919 ➖ जलियाँवाला बाग हत्याकांड


►1919 ➖ मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार


►1920 ➖ खिलाफत आंदोलन


►1920 ➖ असहयोग आंदोलन


►1922 ➖ चौरी-चौरा कांड




►1927 ➖ साइमन कमीशन की नियुक्ति


►1928 ➖ साइमन कमीशन का भारत आगमन


►1929 ➖ भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट


►1929 ➖ कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग


►1930 ➖ सविनय अवज्ञा आंदोलन




►1930 ➖ प्रथम गोलमेज सम्मेलन


►1931 ➖ द्वितीय गोलमेज सम्मेलन


►1932 ➖ तृतीय गोलमेज सम्मेलन


►1932 ➖ सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा


►1932 ➖ पूना पैक्ट




►1942 ➖ भारत छोड़ो आंदोलन


►1942 ➖ क्रिप्स मिशन का आगमन


►1943 ➖ आजाद हिन्द फौज की स्थापना


►1946 ➖ कैबिनेट मिशन का आगमन


►1946 ➖ भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन




►1946 ➖ अंतरिम सरकार की स्थापना


►1947 ➖ भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना


►1947 ➖ भारतीय स्वतंत्रता प्राप्तिराष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं


►1904 ➖ भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित


►1905 ➖ बंगाल का विभाजन




►1906 ➖ मुस्लिम लीग की स्थापना


►1907 ➖ सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट


►1909 ➖ मार्ले-मिंटो सुधार


►1911 ➖ ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार


►1916 ➖ होमरूल लीग का निर्माण




►1916 ➖ मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)


►1917 ➖ महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन


►1919 ➖ रौलेट अधिनियम


►1919 ➖ जलियाँवाला बाग हत्याकांड


►1919 ➖ मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार




►1920 ➖ खिलाफत आंदोलन


►1920 ➖ असहयोग आंदोलन


►1922 ➖ चौरी-चौरा कांड


►1927 ➖ साइमन कमीशन की नियुक्ति


►1928 ➖ साइमन कमीशन का भारत आगमन




►1929 ➖ भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट


►1929 ➖ कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग


►1930 ➖ सविनय अवज्ञा आंदोलन


►1930 ➖ प्रथम गोलमेज सम्मेलन


►1931 ➖ द्वितीय गोलमेज सम्मेलन




►1932 ➖ तृतीय गोलमेज सम्मेलन


►1932 ➖ सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा


►1932 ➖ पूना पैक्ट


►1942 ➖ भारत छोड़ो आंदोलन


►1942 ➖ क्रिप्स मिशन का आगमन




►1943 ➖ आजाद हिन्द फौज की स्थापना


►1946 ➖ कैबिनेट मिशन का आगमन


►1946 ➖ भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन


►1946 ➖ अंतरिम सरकार की स्थापना


►1947 ➖ भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना


►1947 ➖ भारतीय स्वतंत्रता

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन (Major convention of Indian National Congress)

 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन

(Major convention of Indian National Congress)



▶️  1885 का कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन:-


◆स्थान -बम्बई।


◆ अध्यक्ष - व्योमेश चन्द्र बनर्जी दो बार अध्यक्ष (1885,1892)


◆ 72 प्रतिनधियों ने भाग लिया।


दादा भाई नौरोजी के सुझाव पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नाम रखा गया।



▶️  1886 कांग्रेस का अधिवेशन:-


◆ स्थान -कलकत्ता।


अध्यक्ष - दादा भाई नौरोजी (तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने 1886,1893,1906)



▶️  1887 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - मद्रास।


अध्यक्ष - बदरुद्दीन तैय्यब ( कांग्रेस के पहले मुस्लिम अध्यक्ष थे)



▶️  1888 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - इलाहाबाद।


◆ अध्यक्ष - जॉर्ज यूले (प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष) 



▶️  1896 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - कलकत्ता।


◆ अध्यक्ष - रहीमतुल्ला सयानी।


इस अधिवेशन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का पहली बार गायन किया गया।



▶️  1905 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - वारणसी।


◆ अध्यक्ष - गोपाल कृष्ण गोखले।


स्वदेशी आंदोलन का समर्थन।



▶️  1906 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - कलकत्ता।


◆ अध्यक्ष - दादा भाई नैरोजी।


◆ इस अधिवेशन में पहली बार स्वराज शब्द का प्रयोग किया गया।



▶️  1907 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - सूरत।


◆ अध्यक्ष - रास बिहारी घोष।


◆ इस अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन ।



▶️  1911 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - कलकत्ता।


◆ अध्यक्ष - विशन नारायण दर।


◆ इस अधिवेशन में पहली बार जन गण मन का गान किया गया।



▶️  1916 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - लखनऊ।


◆ अध्यक्ष - अम्बिकचरण मजूमदार।


◆ इस अधिवेशन में कांग्रेस-लीग के बीच लखनऊ पैक्ट (पृथक निर्वाचन स्वीकार)


नरम दल और गरम दल एक हुए।



▶️ 1917 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - कलकत्ता।


अध्यक्ष - एनी बेसेंट ( कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनी )


तीन महिलाएं कांग्रेस की अध्यक्ष बनी ।


◆ 1917 में एनी बेसेंट।


1925 में सरोजिनी नायडू (प्रथम भातीय महिला )


◆ 1933 में नलनी सेन गुप्ता।



▶️ 1919 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - अमृतसर।


◆ अध्यक्ष - मोती लाल नेहरू ( दो बार अध्यक्ष बने 1919,1928)



▶️  1920 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - नागपुर।


◆ अध्यक्ष - वीर राघवाचारी।


असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ।


कांग्रेस द्वारा पहली बार भाषाई आधार पर प्रान्तों के गठन की बात की गई।



▶️  1924 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - बेलगाँव ( कर्नाटक )


अध्यक्ष - महात्मा गांधी ( मात्र एक बार )



▶️  1929 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - लाहौर।


◆ अध्यक्ष - जवाहर लाल नेहरू।


इस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ।


26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निश्चय किया गया।



▶️  1931 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - कराची।


◆ अध्यक्ष - बल्लभ भाई पटेल।


◆ इस अधिवेशन में मौलिक अधिकार सम्बन्धी प्रस्ताव पारित किया गया।


इसी अधिवेशन में गाँधी ने कहा था गाँधी मर सकते हैं परतन्तु गांधीवाद नहीं।



▶️  1936 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - लखनऊ।


◆ अध्यक्ष - जवाहर लाल नेहरू।


◆ इसी अधिवेशन में नेहरू ने कहा मैं समाजवादी हूँ।



▶️  1937 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - फैजपुर।


◆ अध्यक्ष - जवाहर लाल नेहरू।


पहली बार कांग्रेस का अधिवेशन किसी गॉव में हुआ।



▶️  1938 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - हरिपुरा ( गुजरात )


◆ अध्यक्ष - सुभाष चंद्र बोस।


इसी अधिवेशन में राष्ट्रीय नियोजन समिति का गठन।



▶️  1939 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान - त्रिपुरी ( जबलपुर, मध्यप्रदेश)


◆ अध्यक्ष -सुभाष चंद्र बोस।


इसी अधिवेशन में गाँधी जी से विवाद होने के कारण सुभाष द्वारा त्यागपत्र दिया जाना तथा  राजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया।



▶️  1940 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ स्थान -  रामगढ़।


◆ अध्यक्ष - अबुल कलाम आजाद।


ये सबसे लंबे समय तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे 1940-1945 तक



▶️ 1947 का कांग्रेस अधिवेशन:-


◆ अध्यक्ष - जे.बी. कृपलानी।

गौतम बुद्ध (Gautam buddha)

 

❇️ गौतम बुद्ध ❇️

(Gautam buddha)




छठी शताब्दी ईसा पूर्व हुए धार्मिक आंदोलन में बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका है। जानिए गौतम और बौद्ध धर्म के बारे में|


➡️ जन्म - 563 ई.पू.  

➡️ जन्म स्थान - लुम्बिनी

➡️ बचपन का नाम - सिद्धार्थ

➡️ माता - महामाया

➡️ पिता - शुद्धोधन

➡️ पत्नी - यशोधरा

➡️ पुत्र- राहुल


➡️ महाभिनिष्क्रमण/गृहत्याग - 29 वर्ष की अवस्था में

➡️ ज्ञान प्राप्ति - निरंजना नदी तट पर उरुबेला में

➡️ धर्मचक्रप्रवर्तन/प्रथम उपदेश - ऋषिपट्टनम के मृगदाव में

➡️महापरिनिर्वाण/मृत्यु - 483 ई. पू. में 

➡️ मृत्युस्थान - कुशीनगर में

➡️ सिद्धार्थ के जन्म के सातवें दिन ही इनकी माता महामाया का स्वर्गवास हो गया था। अतः इनका पालन-पोषण मौसी गौतमी ने किया। 


बुद्ध का हृदय परिवर्तन:-

➡️ चार महत्वपूर्ण घटना जिनके कारण बुद्ध को जीवन की सिख मिली । 

1. एक बूढ़ा व्यक्ति – दु:खी

2. एक बीमार व्यक्ति - दु:खी

3. मृत व्यक्ति - दु:खी

4. सन्यासी - प्रसन्न मुद्रा में

➡️ इसी यात्रा से इनके जीवन की वास्तविक यात्रा का प्रारम्भ हुआ व हृदय परिवर्तन हुआ। अंत में इन्होंने इनमें से अंतिम दृश्य अर्थात सन्यास के मार्ग पर चलने का निश्चय किया।


महाभिनिष्क्रमण (गृहत्याग):-

➡️ राजमहल और अपनी वैवाहिक सुख सुविधाओं को छोड़कर 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग दिया। इस घटना को बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहा गया। 



ज्ञान की प्राप्ति:-

➡️ 6 वर्ष तपस्या के बाद 35 वर्ष की अवस्था में वैशाख पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के तट पर बोधिवृक्ष के नीचे इन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुयी। 



धर्मचक्रप्रवर्तन/प्रथम उपदेश:-

➡️ बुद्ध का प्रथम उपदेश धर्मचक्रप्रवर्तन के नाम से जाना जाता है, जो सारनाथ में दिया। 



महापरिनिर्वाण/मृत्यु:-

➡️ इनकी मृत्यु को बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया| महापरिनिर्वाण  हिरण्यवती नदी के तट पर में 483 ई.पू. में हुआ।

संविधान दिवस (Constitution Day)

 संविधान दिवस (Constitution Day)



उद्देश्य: - संविधान दिवस (संविधान दिवस) को मनाने का उद्देश्य संविधान के महत्व का प्रसार करना है।


➡️ घोषणा: -

2015 11 अक्टूबर, 2015 (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा) 

◆ इससे पूर्व 26 नवंबर को 'विधि दिवस' मनाया जाता था।

◆ पहला आयोजन 26 नवंबर, 2015 (डॉ। भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में)

➡️ पृष्ठभूमि: - (कास्ट बनने की तैयारी) 

◆ आजादी के बाद 9 दिसंबर 1946 को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की पहली बैठक हुई।

◆ इस बैठक में 207 सदस्य उपस्थित थे।

◆ पूर्व में संविधान सभा के सदस्यों की संख्या जहाँ 389 थी, वही देश के विभाजन के पश्चात यह संख्या घटकर 299 रह गई।

इसका 29 अगस्त 1947 को सवि सभा में इसके तैयार होने के लिए डॉ। भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया।                                         

तैयार 26 नवंबर, 1949 को भारतीय संविधान बनकर तैयार हुआ। इसी दिन कास्ट के 16 अनुच्छेदों को लागू कर इसे अंगीकृत किया गया, अधिन्त और आत्मारहित किया गया।

28 24 जनवरी, 1950 को सभा की अंतिम बैठक में 284 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए। इसी दिन कॉन्सटेंट सभा ने डॉ। राजेन्द्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।

◆ 26 जनवरी 1950 को भारत का अपना व दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान व्यवहारिक तौर पर अस्तित्व में आया।

➡️ संविधान सभा के प्रमुख सदस्य: -

👉संस्थान सभा के सदस्य भारत के राज्य सभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने गए थे: -

  • जवाहरलाल नेहरू
  • डॉ। भीमराव अंबेडकर
  • डॉ। राजेन्द्र प्रसाद
  • सरदार वल्लभ भाई पटेल
  • मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे।

डॉ राजेन्द्र प्रसाद(Dr. Rajendra Prasad)


 डॉ राजेन्द्र प्रसाद✵

(Dr. Rajendra Prasad)




  • भारतीय राजनेता, वकील व पत्रकार होने के साथ ही भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति।


  • उपनाम : राजेन्द्र बाबू, देशरत्न।


  • जन्म : 3 दिसंबर 1884,जीरादेई (बिहार)


  • निधन : 28 फरवरी 1963, पटना (बिहार)


  • राष्ट्रपति पद पर कार्यकाल : 1950 – 1962


  • भारत रत्न से सम्मानित : वर्ष 1962


शिक्षा:-

• एम.ए – अर्थशास्त्र

• वकालत- 1909, रिपन कॉलेज, (वर्तमान में सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज), कलकत्ता

• 1915 - विधि विभाग से परास्नातक (स्वर्ण पदक)

• 1916- बिहार और ओडिशा के उच्च न्यायालय में शामिल होने के साथ ही 1917- पटना विश्वविद्यालय के सीनेट और सिंडिकेट के पहले सदस्य के रूप में नियुक्त।

• 1937 - इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट


साहित्यिक रचनाएं :-

• बापू के क़दमों में बाबू।

• भारतीय संस्कृति व खादी का अर्थशास्त्र।

• गाँधी जी की देन ।

• इंडिया डिवाइडेड ।


स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका:-

• नमक सत्याग्रह आंदोलन,1931

• भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बम्बई अधिवेशन (1934) के अध्यक्ष।

• सुभाषचन्द्र बोस के त्यागपत्र देने के पश्चात पुनः 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया।

• भारत छोड़ो आंदोलन,1942

• 11 दिसंबर 1946 – बतौर संविधान सभा अध्यक्ष चयनित।


आत्मकथा:

• अट्टमकथा, 1946 में प्रकाशित।

सिंधु घाटी सभ्यता


  सिंधु घाटी सभ्यता


1. हड़प्पा:-

नदी के नाम: रावी 

उत्त्खनन का वर्ष: 1921 

उत्तखननकर्ता: दयाराम साहनी और माधोस्वरूप वत्स 

वर्तमान स्तिथि: पश्चिम पंजाब का मांटमोगरी जिला (पाकिस्तान)


2. मोहनजोदड़ो:-

नदी के नाम: सिन्धु

उत्त्खनन का वर्ष: 1922

उत्तखननकर्ता: राखलदास बनर्जी

वर्तमान स्तिथि: सिंध प्रान्त का लरकाना जिला (पाकिस्तान)


3. चन्हूदड़ो:-

नदी के नाम: सिन्धु

उत्त्खनन का वर्ष: 1931

उत्तखननकर्ता: गोपाल मजूमदार

वर्तमान स्तिथि: सिंध प्रान्त(पाकिस्तान)


4. कालीबंगा:-

नदी के नाम: घग्घर

उत्त्खनन का वर्ष: 1953

उत्तखननकर्ता: अमलानंद घोष.. बी.बी.लाल और बी.के. थापर

वर्तमान स्तिथि: राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला (भारत)


5. कोटदीजी:-

नदियों के नाम: सिन्धु

उत्त्खनन का वर्ष: 1935

उत्तखननकर्ता: फजल अहमद

वर्तमान स्तिथि: सिंध प्रान्त का खैरपुर (पाकिस्तान)


6. रंगपुर:-

नदियों के नाम: मादर

उत्त्खनन का वर्ष: 1933

उत्तखननकर्ता: रंगनाथ राव

वर्तमान स्तिथि: गुजरात का काठियावाड क्षेत्र (भारत)


7. रोपड़:-

नदियों के नाम: सतलज

उत्त्खनन का वर्ष: 1953-56

उत्तखननकर्ता: यज्ञदत्त शर्मा

वर्तमान स्तिथि: पंजाब का रोपड़ जिला (भारत)


8. लोथल:-

नदियों के नाम: भोगवा

उत्त्खनन का वर्ष:1955-1962

उत्तखननकर्ता: रंगनाथ राव

वर्तमान स्तिथि: गुजरात का अहमदाबाद जिला (भारत)


9. आलमगीरपुर:-

नदियों के नाम: हिंडन

उत्त्खनन का वर्ष: 1958

उत्तखननकर्ता: यज्ञदत्त शर्मा

वर्तमान स्तिथि: उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला (भारत)


10. बनावली:-

नदियों के नाम: रंगोई

उत्त्खनन का वर्ष: 1974

उत्तखननकर्ता: रविन्द्रनाथ विष्ट

वर्तमान स्तिथि: हरियाणा का हिसार जिला (भारत)


11. धौलावीरा

उत्त्खनन का वर्ष: 1990-91

उत्तखननकर्ता: रविन्द्रनाथ विष्ट

वर्तमान स्तिथि: गुजरात का कच्छ जिला (भारत)

राणा सांगा

 राणा सांगा✬




1509 ई. में जब राणा सांगा का राज्यभिषेक हुआ। तब दिल्ली का शासक सिकन्दर लोदी था। 1505 में उसने आगरा की स्थापना करवाई। 1517 में उसकी मृत्यु के उपरान्त इसका पुत्र इब्राहिम लोदी शासक बना। उसने मेवाड़ पर दो बार आक्रमण किया।


1. खातोली का युद्ध (बूंदी) 1518 2.बारी (धौलपुर) का युद्ध


➢दोनो युद्धो में इब्राहिम लोदी की पराजय हुई। 1518 से 1526 ई. तक के मध्य राणा सांगाा अपने चरमोत्कर्ष पर था। 1519 में राणा सांगा ने गागरोन के युद्ध में मालवा के शासक महमूद खिल्ली द्वितीय को पराजित किया।


पानीपत का प्रथम युद्ध (21 अप्रेल 1526)


1. मूगल शासक बाबर


2. पठान शासक इब्राहिम लोदी


इस युद्ध में बाबर की विजय हुई और उसने भारत में मुगल वंश की नीव डाली। 1527 में बाबर व राणा सांगा के मध्य दो बार युद्ध हुआ। 


फरवरी 1527 में बयाना का युद्ध (भरतपुर) सांगा विजयी, 17 मार्च 1527 खानवा युद्ध (भरतपुर)


खानवा युद्ध (भरतपुर)


1. बाबर - संयुक्त सेना


2. मुगल सेना - राणा सांगा विजयी    


-मारवाड शासक राव गंगा -इसने अपने पुत्र


-माल देव के नेतृत्व मे 4000 सैनिक भेजे


- बीकानेर - कल्याण मल


-आमेर- पृथ्वीराज कछवाह


-हसन खां मेवाती -खानवा युद्ध में सेनापति


-चदेरी का मेदिनी राय


-बागड़ (डूंगरपुर)का रावल उदयपुरसिंह व खेतसी


-देवलिया का राव बाघ सिंह


- ईडर का भारमल


-झाला अज्जा


बाबर ने इस युद्ध को जेहाद (धर्मयुद्ध) का नाम दिया। इस युद्ध में बाबर की विजय हुई। बाबर ने गाजी (विश्वविजेता) की उपाधी धारण की। 1528 ई. में राणा सांगा को किसी सामन्त ने जहर दे दिया परिणामस्वरूप सांगा की मृत्यु हो गई। सांगा का अन्तिम संस्कार भीलवाडा के माडलगढ़ नामक स्थाप पर किया गया जहां सांगा की समाधी /छतरी है।


राणा सांगा के शरीर पर 80 से अधिक धाव थे कर्नल जेम्स टाॅड ने राणा सांगा को मानव शरीर का खण्डहर (सैनिक भग्नावेश) कहा है।

​​‘भारत रत्न’ डॉ. राजेंद्र प्रसाद('Bharat Ratna' Dr. Rajendra Prasad)


 ​​‘भारत रत्न’ डॉ. राजेंद्र प्रसाद 

('Bharat Ratna' Dr. Rajendra Prasad)



(3 दिसम्बर 1884  - 28 फ़रवरी 1963)

उपनाम : 'राजेन्द्र बाबू' तथा ‘देश रत्न ’।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति एवं महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म  बिहार के तत्कालीन  सारण जिले (वर्तमान में सीवान) के जीरादेई  गाँव में हुआ था।

शैक्षिक सम्बद्धता : कलकत्ता विश्वविद्यालय।

राजनीतिक दल : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस।


कार्य व पद :-

1934 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए। 

•1939 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने पर कांग्रेस अध्यक्ष का पुन: पदभार सँभाला।

•भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

•वर्ष 1946  व 1947 : भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में कृषि और खाद्यमंत्री का दायित्व संभाला।


सम्मान व उपलब्धियां :-

26 जनवरी 1950 से 14 मई 1962 : भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल।

•दो कार्यकाल पूरा करने वाले एकमात्र राष्ट्रपति। 

•1962 - 'भारतरत्न ' की सर्वश्रेष्ठ उपाधि से नवाजा गया। 


भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका :-

बतौर वक़ील के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत से ही आंदोलन में सक्रिय भूमिका में आए।

•चम्पारण में गान्धीजी का साथ दिया।

•1921 में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के सीनेटर का पदत्याग कर दिया इसके सिवा आजादी की लड़ाई में कारावास की सजा भी भुगती। 

प्रभाव : राजेन्द्र बाबू महात्मा गाँधी की निष्ठा, समर्पण व साहस से बहुत प्रभावित थे।


एक लेखक के तौर पर :- 

अपनी आत्मकथा के अलावा 'बापू के कदमों में बाबू', 'इंडिया डिवाइडेड', 'सत्याग्रह ऐट चम्पारण', 'गांधीजी की देन' और 'भारतीय संस्कृति व खादी का अर्थशास्त्र'  पुस्तकें लिखी

राणा कुम्भा(Rana Kumbha)

 राणा कुम्भा

(Rana Kumbha)




  • 1433-1468 ई. राजस्थान की स्थापत्य कला का जनक मेवाड़ के 84 दुर्गो में से 32 दुर्ग बनवाएं राजनीतिक व सांस्कृतिक दृष्टि कुम्भा का स्थान महत्वपूर्ण है। उन्होंने 1433 में सारंगपुर के युद्ध में मालवा के शासक महमुद खिलजी प्रथम को पराजित किया। इसी विजय के उपलक्ष में 1444 में चित्तौड़ के विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया वर्तमान में विजय स्तम्भ राजस्थान पुलिस का प्रतिक चिन्ह है। इसके वास्तुकार राव जैता थे।


1. विजय स्तम्भ


2. कीर्ति स्तम्भ


3. कुम्भ श्याम मंदिर (मीरा मंदिर)


4. कुंभलगढ दुर्ग (राजसंमद)


5. मचाना दुर्ग (सिरोही)


6. बसंती दुर्ग (सिरोही)


7. अचलगढ़दुर्ग (माऊट आबू)


  • राणा कुंभा संगीत के विद्वान थे। उन्हे " अभिन्व भत्र्ताचार्य" भी कहा जाता हैं कुंभा ने "संगीतराज " "रसिकप्रिय" "नृत्य" "रतन कोष" व "सूढ प्रबंध" ग्रन्थों की रचना की थी। रसिका प्रिया गीत गोविन्द पर टीका है। 


  • राणा कुंभा के दरबार में प्रसिद्ध शिल्पकार "मण्डन" था। जिसने "रूप मण्डन" "प्रसाद मण्डन" "वास्तुमण्डन" "रूपावतार मण्डन" ग्रन्थों की रचना की। रूपावतार मण्डन (मूर्ति निर्माण प्रकरण) इसमें मूर्ति निर्माण की जानकारी मिलती है। 

  • मण्डन के भाई नाथा ने "वस्तुमंजरी" पुस्तक की रचना की मण्डन के पुत्र गोविन्द ने "उद्धार घौरिणी" "द्वार दीपिक" व कुंभा के दरबारी कवि कान्ह जी व्यास ने "एकलिंग में ग्रंथ" लिखा। 


  • 1468 ई. कुंभलगढ़ दुर्ग में राणा कुंभा के पुत्र ऊदा (उदयकरण) ने अपने पिता की हत्या कर दी। उदयकरण को पितृहंता कहा जाता है।


  • ऊदा (उदयकरण) → रायमल (1509 में देहांत) 


  • ​पृथ्वी राज सिसोदिया (उडना राजकुमार) - राणासंग्राम सिंह(1509-1528) (हिन्दुपात)(5 मई 1509 में राज्यभिषेक 30 जनवरी 1528 में मृत्यु)


  • कुंभा के पुत्र रायमल ने ऊदा को मेवाड़ से भगा दिया एवं स्वयं शासक बना। रायमल का बडा पुत्र पृथ्वीराज सिसोदिया तेज धावक था। अतः उसे उडना राजकुमार कहा जाता था। 1509 ई में रायमल का पुत्र संग्राम सिंह मेवाड का शासक बना।

प्रमोद करण सेठी (Dr. P. K. Sethi)

 


 प्रमोद करण सेठी 

(Dr. P. K. Sethi)



  • जन्म:- 28 नवम्बर 1927  
  • निधन:- 6 जनवरी, 2008

➢व्यक्तित्व:-

1. जयपुर फुट के अविष्कारक



2. कार्बन फाइबर कंपोजिट के साथ हल्के कैलिपर्स विकसित करने की दिशा में काम किया

➢पुरस्कार:-

1. पद्मश्री – 1981

2. वेस्टर्न इंडिया ऑर्थोपेडिक सोसाइटी गोल्ड मेडल

3. रेमन मैग्सेसे अवार्ड

4. वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए गिनीज अवार्ड

5. उत्कृष्ट चिकित्सा अनुसंधान के लिए आर डी बिरला अवार्ड

6. नूड जेन्स मेडल सहित विभिन्न पुरस्कार

7. प्रख्यात मेडिकल मैन के रूप में 1989 में डॉ बी रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

8. भारतीय आर्थोपेडिक एसोसिएशन द्वारा 2004 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित

ज्ञानचंद्र घोष (14 सितम्बर 1894 - 21 जनवरी 1959)


 ज्ञानचंद्र घोष

 (14 सितम्बर 1894 - 21 जनवरी 1959)



➢पुरुलिया, पश्चिम बंगाल में 14 सितम्बर 1894 में जन्में ज्ञानचंद्र घोष भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में से एक थे।


शिक्षा :-

वर्ष 1915 - एम.एस.सी. प्रेसिडेंसी कॉलेज, कलकत्ता विश्वविद्यालय (वर्तमान कोलकाता)

• वर्ष 1918 - डी.एस.सी. की उपाधि प्राप्त की।


विदेश में :-

• वर्ष 1919 में ज्ञान चंद्र घोष ने यूरोप में प्रोफ़ेसर डोनान (इंग्लैंड) और डॉ. नर्स्ट व डॉ. हेवर (जर्मनी) के अधीन कार्य किया।


कार्यक्षेत्र :-

• प्रोफेसर – साइंस कॉलेज (कलकत्ता विश्वविद्यालय)

• वर्ष 1921 - ढाका विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर नियुक्त।

• वर्ष 1939 – डायरेक्टर, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बेंगलोर। 


प्रसिद्ध सिद्धांत :-

‘घोष का तनुता सिद्धांत’ 


उच्च पद पर :-

वर्ष 1947-1950 - डायरेक्टर जनरल ऑफ इंडस्ट्रीज एंड सप्लाइज़, भारत सरकार।

• संस्थापक व डायरेक्टर, खड़गपुर तकनीकी संस्थान।

• उपकुलपति, कलकत्ता विश्वविद्यालय।  

• योजना आयोग के सदस्य, भारत सरकार।

• अनुसंधान कार्यक्षेत्र में इंडियन साइंस कांग्रेस और भारतीय केमिकल सोसायटी के अध्यक्ष नियुक्त।


ज्ञानचंद्र घोष के अनुसंधान विषय :-

विशेष रूप से विद्युत रसायन, गति विज्ञान, उच्चताप गैस अभिक्रिया, उत्प्रेरण, आत्मऑक्सीकरण, प्रतिदीप्ति थे।

गुरु गोबिंद सिंह जी जयंती


 गुरु गोबिंद सिंह जी जयंती 



ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह दिन दिसंबर या जनवरी में अथवा कभी – कभी वर्ष में दो बार भी आता है।


गुरु गोबिंद सिंह जी (वर्ष 1666 – वर्ष 1708) :-

आध्यात्मिक गुरु, कवि व दार्शनिक गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 22 दिसंबर 1666  में पटना साहिब, बिहार में हुआ था। नानकशाही कैलेंडर के अनुसार उनके जन्मोत्सव को प्रकाश पर्व के रुप में मनाया जाता है।

• वर्ष 1675 में अपने पिता व सिखों के 9 वें गुरु, गुरु तेग बहादुर के औरंगजेब की सेना से लड़ते हुए शहीद होने के बाद 9 वर्ष की आयु में गुरु गोबिंद सिंह जी ने बतौर सिखों के 10 वें व अंतिम गुरु के रूप में नेतृत्व की कमान संभाली।

• इन्होंने पांच सिद्धांत दिए हैं जिन्हें “पंच ककार” कहा जाता है। इनमें पांच चीजों को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हैं- केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा। 

• वर्ष 1699 में बैसाखी के दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की तथा प्रत्येक सिख के लिए कृपाण या श्री साहिब धारण करना अनिवार्य किया।


प्रेरक वाक्य व वाणी :-

सवा लाख से एक लड़ाऊँ चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊं तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊं।

खालसा वाणी - वाहेगुरु जी दा खालसा वाहेगुरु जी दी फतह।

• मृत्यु से पूर्व उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को स्थायी सिख गुरु के रूप में घोषित किया जो सिख धर्म में एक पवित्र ग्रंथ है।


इस अवसर पर आयोजन :-

तीन दिनों तक गुरुद्वारों में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ के साथ ही संगीतकारों और पंज प्यारों के नेतृत्व में जुलूस व खालसा पंत की झांकियां निकाली जाती है। लंगर के खास आयोजन में लोगों को व्यंजन, शरबत, शीतल पेय और मिठाई बांटी जाती हैं। 

बिहार के पटना साहिब गुरुद्वारें में संगतों की भारी भीड़ उमड़ती है, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी की छोटी कृपाण, खड़ाऊ और कंघे सहित उनसे जुड़ी सभी चीजें मौजूद हैं

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