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6th राज्य वित्त आयोग के गठन को मंजूरी (6th State Finance Commission Sanction)


6th राज्य वित्त आयोग के गठन को मंजूरी 

(6th State Finance Commission Sanction)



🔷 राज्य वित्त आयोग का गठन संविधान के भाग 9 के अनुच्छेद 243 I & Y में है।


🔶 इसका गठन प्रति 5 वर्ष के अंतराल पर राज्यपाल द्वारा किया जाता है।


🔷 यह स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा का कार्य करता है।


🔶 राज्य में अब तक 5 राज्य वित्त आयोग गठित किये जा चुके है।



❇️ 6th राज्य वित्त आयोग :- 


🔷 अध्यक्ष -  प्रद्युम्न सिंह (14 वीं विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर भी रहे है।) 

 

🔶 सदस्य - (1) लक्ष्मण सिंह

                  (2) अशोक लाहोटी


🔷 राज्य वित्त आयोग में अधिकतम 4 सदस्यों का प्रावधान है।


🔷 कार्यकाल - 2021-2025


🔶 पंचम राज्य वित्त आयोग की अध्यक्ष ज्योति किरण थी।


╭─❀⊰╯ 

भारतीय संविधान के महत्त्वपूर्ण संशोधन (Important Amendments to the Indian Constitution)

 

भारतीय संविधान के महत्त्वपूर्ण संशोधन

(Important Amendments to the Indian Constitution)



●. पहला संशोधन (1951) — इस संशोधन द्वारा नौवीं अनुसूची को शामिल किया गया।


●. दूसरा संशोधन (1952) — संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व को निर्धारित किया गया।


●. सातवां संशोधन (1956) — इस संशोधन द्वारा राज्यों का अ, ब, स और द वर्गों में विभाजन समाप्त कर उन्हें 14 राज्यों और 6 केंद्रशासित क्षेत्रों में विभक्त कर दिया गया।


●. दसवां संशोधन (1961) — दादरा और नगर हवेली को भारतीय संघ में शामिल कर उन्हें संघीय क्षेत्र की स्थिति प्रदान की गई।


●. 12वां संशोधन (1962) — गोवा, दमन और दीव का भारतीय संघ में एकीकरण किया गया।




●. 13वां संशोधन (1962) — संविधान में एक नया अनुच्छेद 371 (अ) जोड़ा गया, जिसमें नागालैंड के प्रशासन के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए गए। 1दिसंबर, 1963 को नागालैंड को एक राज्य की स्थिति प्रदान कर दी गई।


●. 14वां संशोधन (1963) — पांडिचेरी को संघ राज्य क्षेत्र के रूप में प्रथम अनुसूची में जोड़ा गया तथा इन संघ राज्य क्षेत्रों (हिमाचल प्रदेश, गोवा, दमन और दीव, पांडिचेरी और मणिपुर) में विधानसभाओं की स्थापना की व्यवस्था की गई।


●. 21वां संशोधन (1967) — आठवीं अनुसूची में ‘सिंधी’ भाषा को जोड़ा गया।


●. 22वां संशोधन (1968) — संसद को मेघालय को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित करने तथा उसके लिए विधानमंडल और मंत्रिपरिषद का उपबंध करने की शक्ति प्रदान की गई।


●. 24वां संशोधन (1971) — संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन का अधिकार दिया गया।




●. 27वां संशोधन (1971) — उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र के पाँच राज्यों तत्कालीन असम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर व त्रिपुरा तथा दो संघीय क्षेत्रों मिजोरम और अरुणालच प्रदेश का गठन किया गया तथा इनमें समन्वय और सहयोग के लिए एक ‘पूर्वोत्तर सीमांत परिषद्’ की स्थापना की गई।


●. 31वां संशोधन (1974) — लोकसभा की अधिकतम सदंस्य संख्या 545 निश्चित की गई। इनमें से 543 निर्वाचित व 2 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होंगे।


●. 36वां संशोधन (1975) — सिक्किम को भारतीय संघ में 22वें राज्य के रूप में प्रवेश दिया गया।


●. 37वां संशोधन (1975) — अरुणाचल प्रदेश में व्यवस्थापिका तथा मंत्रिपरिषद् की स्थापना की गई।




●.42वां संशोधन (1976) — इसे ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) की संज्ञा प्रदान की गई है।


— इसके द्वारा संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’, ‘समाजवादी’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए।

— इसके द्वारा अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की व्यवस्था करते हुए नागरिकों के 10 मूल कर्त्तव्य निश्चित किए गए।

— लोकसभा तथा विधानसभाओं के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि की गई।

— नीति-निर्देशक तत्वों में कुछ नवीन तत्व जोड़े गए।

— इसके द्वारा शिक्षा, नाप-तौल, वन और जंगली जानवर तथा पक्षियों की रक्षा, ये विषय राज्य सूची से निकालकर समवर्ती सूची में रख दिए गए।

— यह व्यवस्था की गई कि अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आपातकाल संपूर्ण देश में लागू किया जा सकता है या देश के किसी एक या कुछ भागों के लिए।

— संसद द्वारा किए गए संविधान संशोधन को न्यायालय में चुनौती देने से वर्जित कर दिया गया।




●. 44वां संशोधन (1978) — संपत्ति के मूलाधिकार को समाप्त करके इसे विधिक अधिकार बना दिया गया।


— लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि पुनः 5 वर्ष कर दी गई।

— राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष्ज्ञ के चुनाव विवादों की सुनवाई का अधिकार पुनः सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालय को ही दे दिया गया।

— मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रपति को जो भी परामर्श दिया जाएगा, राष्ट्रपति मंत्रिमंडल को उस पर दोबारा विचार करने लिए कह सकेंगे लेकिन पुनर्विचार के बाद मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को जो भी परामर्श देगा, राष्ट्रपति उस परामर्श को अनिवार्यतः स्वीकार करेंगे।

— ‘व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार’ को शासन के द्वारा आपातकाल में भी स्थगित या सीमित नहीं किया जा सकता, आदि।




●. 52वां संशोधन (1985) — इस संशोधन द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके द्वारा राजनीतिक दल-बदल पर कानूनी रोक लगाने की चेष्टा की गई है।


●. 55वां संशोधन (1986) — अरुणाचल प्रदेश को भारतीय संघ के अन्तर्गत राज्य की दर्जा प्रदान की गई।


●. 56वां संशोधन (1987) — इसमें गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा देने तथा ‘दमन व दीव’ को नया संघीय क्षेत्र बनाने की व्यवस्था है।


●. 61वां संशोधन (1989) — मताधिकार के लिए न्यूनतम आवश्यक आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।


●. 65वां संशोधन (1990) — ‘अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग’ के गठन की व्यवस्था की गई।

भारतीय संविधान के भाग (Parts of Indian Constitution )


भारतीय संविधान के भाग 

(Parts of Indian Constitution )




भाग I - संघ और उसके क्षेत्र(अनुच्छेद 1-4)


भाग II- नागरिकता(अनुच्छेद 5-11)


भाग III- मूलभूत अधिकार(अनुच्छेद 12 - 35)


भाग IV- राज्य के नीति निदेशक तत्व(अनुच्छेद 36 - 51)


भाग IVA- मूल कर्तव्य(अनुच्छेद 51A)


भाग V- संघ(अनुच्छेद 52-151)



भाग VI- राज्य(अनुच्छेद 152 -237)


भाग VII- संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित


भाग VIII- संघ राज्य क्षेत्र(अनुच्छेद 239-242)


भाग IX- पंचायत(अनुच्छेद 243- 243O)


भाग IXA- नगर्पालिकाएं(अनुच्छेद 243P - 243ZG)


भाग X- अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र(अनुच्छेद 244 - 244A)




भाग XI- संघ और राज्यों के बीच संबंध(अनुच्छेद 245 - 263)


भाग XII- वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद(अनुच्छेद 264 -300A)


भाग XIII- भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम(अनुच्छेद 301 - 307)


भाग XIV- संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं(अनुच्छेद 308 -323)


भाग XIVA- अधिकरण(अनुच्छेद 323A - 323B)


भाग XV- निर्वाचन(अनुच्छेद 324 -329A)




भाग XVI- कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध संबंध(अनुच्छेद 330- 342)


भाग XVII- राजभाषा(अनुच्छेद 343- 351)


भाग XVIII- आपात उपबंध(अनुच्छेद 352 - 360)


भाग XIX- प्रकीर्ण(अनुच्छेद 361 -367)


भाग XX- संविधान के संशोधनअनुच्छेद




भाग XXI- अस्थाई संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध(अनुच्छेद 369 - 392)


भाग XXII- संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन(अनुच्छेद 393 - 395)

राज्यपाल सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी (Governor General Knowledge Quiz)

 राज्यपाल सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

(Governor General Knowledge Quiz)



● राज्यपाल का कार्यकाल कितना होता है  5 वर● राज्य सरकार को भंग कौन कर सकता है ☞ राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति


● किसी राज्य की कार्यपालिका की शक्ति किसमें निहित होती है ☞ राज्यपाल में


● राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है ☞ राष्ट्रपति


● किस व्यक्ति को हटाने का प्रावधान संविधान में नहीं है ☞ राज्यपाल को




● राज्यपाल का वेतन-भत्ता किस कोष से आता है ☞ राज्य की संचित निधि द्वारा


● राज्य सरकार का संवैधानिक प्रमुख कौन होता है ☞ राज्यपाल


● राज्यपाल अपना त्यागपत्र किसे देता है ☞ राष्ट्रपति को


● राष्ट्रपति शासन में राज्य का संचालन कौन करता है ☞ राज्यपाल




● कौन व्यक्ति राष्ट्रपति की इच्छानुसार अपने पद पर बना रहता है ☞ राज्यपाल


● राज्यपाल पद हेतु न्यूनतम आयु कितनी होती है ☞ 35 वर्ष


● राज्यपाल विधानसभा में कितने आंग्ल-भारतीयों की नियुक्ति कर सकता है ☞ एक


● भारत की पहली महिला राज्यपाल कौन थी ☞ सरोजनी नायडू




● ‘राज्यपाल सोने के पिंजरे में निवास करने वाली चिड़िया के समान है’ ये शब्द किसके हैं ☞ सरोजनी नायडू


● किसकी अनुमति के बिना राज्य की विधानसभा में कोई धन विधेयक पास नहीं होता है ☞ राज्यपाल


● राज्यपाल द्वारा जारी किया गया अध्यादेश किसके द्वारा मंजूर किया जाता है ☞ विधानमंडल द्वारा


● राज्य सरकार को कौन भंग कर सकता है ☞ राज्यपाल




● राज्यपाल की मुख्य भूमिका क्या है ☞ केंद्र व राय के मध्य की कड़ी


● किसी राज्य के राज्यपाल को शपथ ग्रहण कौन कराता है ☞ उस राज्य का मुख्य न्यायाधीश


● किस राज्य में राष्ट्रपति शासन के अलावा राज्यपाल शासन भी लागू किया जा सकता है ☞ जम्मू-कश्मीर


● भारत के किस राज्य में प्रथम महिला राज्यपाल बनीं ☞ उत्तर प्रदेश




● जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुसार राज्य में अधिकतम कितने समय के लिए राज्यपाल शासन लगाया जा सकता है ☞ 6 माह


● जम्मू-कश्मीर का ‘सदर-ए-रियासत’ पद नाम बदलकर कब राज्यपाल कर दिया गया ☞ 1965 में


● राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति कौन करता है ☞ राज्यपाल

संपत्ति का अधिकार(Right to Property)


 संपत्ति का अधिकार

(Right to Property)




सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निजी संपत्ति के अधिकार को मानवाधिकार घोषित करने के संबंध में दिया गया निर्णय


चर्चा में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गए एक निर्णय में नागरिकों के निजी संपत्ति पर अधिकार को मानवाधिकार घोषित किया गया है।



मुख्य बिंदु:-

सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय संपत्ति के अधिकार की 44वें संशोधन से पूर्व की स्थिति को आधार मानते हुए दिया है।



क्या था मामला?

वर्ष 1967 में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सड़क निर्माण के लिये अधिग्रहण प्रक्रियाओं का पालन किये बिना एक विधवा महिला की 4 एकड़ ज़मीन अधिगृहीत कर ली गई थी।


एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली अशिक्षित महिला होने के कारण अपीलकर्त्ता अपने अधिकारों तथा विधिक प्रक्रियाओं से अनभिज्ञ थी, अतः उसने राज्य द्वारा अनिवार्य रूप से अधिगृहित भूमि के मुआवज़े के लिये कोई विधिक कार्यवाही नहीं की।



सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय:-

इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि विधि द्वारा संचालित किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य विधि की अनुमति के बिना नागरिकों को उनकी संपत्ति से वंचित नहीं कर सकता है।


राज्य द्वारा किसी नागरिक की निजी भूमि का अधिग्रहण करके उस भूमि पर अपना दावा करना राज्य को अतिक्रमणकारी बनाता है।


राज्य किसी भी नागरिक की संपत्ति पर ‘एडवर्स पजेशन’ (Adverse Possession) के नाम पर अपने स्वामित्त्व का दावा नहीं कर सकता है।



एडवर्स पजेशन(Adverse Possession):-

यह एक विधिक शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ ‘प्रतिकूल कब्ज़ा’ है।


अगर किसी ज़मीन या मकान पर उसके वैध या वास्तविक मालिक के बजाय किसी अन्य व्यक्ति का 12 वर्ष तक अधिकार रहा है और अगर वास्तविक या वैध मालिक ने अपनी अचल संपत्ति को दूसरे के कब्जे से वापस लेने के लिये 12 वर्ष के भीतर कोई कदम नहीं उठाया है तो उसका मालिकाना हक समाप्त हो जाएगा और उस अचल संपत्ति पर जिसने 12 वर्ष तक कब्ज़ा कर रखा है, उस व्यक्ति को कानूनी तौर पर मालिकाना हक दिया जा सकता है।


सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य को अपने स्वयं के नागरिकों की संपत्ति के अधिग्रहण के लिये एडवर्स पजेशन के सिद्धांत को लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।


सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार ने उस विधवा महिला के अशिक्षित होने का लाभ उठाते हुए उसे 52 वर्षों तक मुआवज़ा प्रदान नहीं किया।


इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार को अपीलकर्त्ता को 1 करोड़ रुपए का मुआवज़ा प्रदान करने का आदेश दिया है।


सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार ने जब अपीलकर्त्ता की ज़मीन का अधिग्रहण किया था उस समय संविधान के अनुच्छेद-31 के तहत निजी संपत्ति का अधिकार एक मौलिक अधिकार था।



संपत्ति का अधिकार(Right to Property):-


संपत्ति के अधिकार को वर्ष 1978 में 44वें संविधान संशोधन द्वारा मौलिक अधिकार से विधिक अधिकार में परिवर्तित कर दिया गया था।


44वें संविधान संशोधन से पहले यह अनुच्छेद-31 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार था, परंतु इस संशोधन के बाद इस अधिकार को अनुच्छेद- 300(A) के अंतर्गत एक विधिक अधिकार के रूप में स्थापित किया गया।


सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार भले ही संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं रहा इसके बावजूद भी राज्य किसी व्यक्ति को उसकी निजी संपत्ति से उचित प्रक्रिया और विधि के अधिकार का पालन करके ही वंचित कर सकता है।


भारत संविधान के भाग(Parts of Constitution India)


 भारत संविधान के भाग 

(Parts of Constitution India)




भाग I - संघ और उसके क्षेत्र(अनुच्छेद 1-4)


भाग II- नागरिकता(अनुच्छेद 5-11)


भाग III- मूलभूत अधिकार(अनुच्छेद 12 - 35)


भाग IV- राज्य के नीति निदेशक तत्व(अनुच्छेद 36 - 51)




भाग IVA- मूल कर्तव्य(अनुच्छेद 51A)


भाग V- संघ(अनुच्छेद 52-151)


भाग VI- राज्य(अनुच्छेद 152 -237)


भाग VII- संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित




भाग VIII- संघ राज्य क्षेत्र(अनुच्छेद 239-242)


भाग IX- पंचायत(अनुच्छेद 243- 243O)


भाग IXA- नगर्पालिकाएं(अनुच्छेद 243P - 243ZG)


भाग X- अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र(अनुच्छेद 244 - 244A)




भाग XI- संघ और राज्यों के बीच संबंध(अनुच्छेद 245 - 263)


भाग XII- वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद(अनुच्छेद 264 -300A)


भाग XIII- भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम(अनुच्छेद 301 - 307)


भाग XIV- संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं(अनुच्छेद 308 -323)




भाग XIVA- अधिकरण(अनुच्छेद 323A - 323B)


भाग XV- निर्वाचन(अनुच्छेद 324 -329A)


भाग XVI- कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध संबंध(अनुच्छेद 330- 342)


भाग XVII- राजभाषा(अनुच्छेद 343- 351)




भाग XVIII- आपात उपबंध(अनुच्छेद 352 - 360)


भाग XIX- प्रकीर्ण(अनुच्छेद 361 -367)


भाग XX- संविधान के संशोधनअनुच्छेद


भाग XXI- अस्थाई संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध(अनुच्छेद 369 - 392)


भाग XXII- संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन(अनुच्छेद 393 - 395)

भारतीय संसद पर हमला (Attack on Indian Parliament)


 भारतीय संसद पर हमला

(Attack on Indian Parliament)



• कब : 13 दिसंबर, 2001


• स्थान : नई दिल्ली,  भारत


• हमले का प्रकार : मास शूटिंग तथा  आत्मघाती बम विस्फोट।


• शहीद हुए : 6 पुलिसकर्मी, 2 संसद सुरक्षाकर्मी, और एक बागवान (माली)।


• मारे गए : 05 आंतकवादी।


• हमले के जिम्मेवार : लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद संगठन।


• निष्कर्ष के बाद, जांच एजेंसी ने 14 मई 2002 में चार मुख्य अभियुक्तों के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारत) की धारा 173 के तहत रिपोर्ट दर्ज की । भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए और  आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002 (पोटा), तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत उन पर निर्दिष्ट सत्र न्यायालय द्वारा मुकदमा दायर किया । इस विशेष न्यायालय की अध्यक्षता एसएन ढींगरा ने की थी ।


•  मुकदमे का समापन : रिकार्ड 6 महीने में ।


•  श्रेय : दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों, एसीपी राजबीर सिंह और मोहन चंद शर्मा को इस मामले में प्रथम दृष्टया सबूत     जुटाने का श्रेय दिया गया था। परन्तु दुर्भाग्य से ये दोनों अधिकारी वर्तमान में हमारे बीच नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट से संबंधित अनुच्छेद (Article related to Supreme Court)


सुप्रीम कोर्ट से संबंधित अनुच्छेद 

(Article related to Supreme Court)



➨ अनुच्छेद 124

सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और संविधान


➨ अनुच्छेद 125

जजों का वेतन आदि


➨ अनुच्छेद 126

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति


➨ अनुच्छेद 127

तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति


➨ अनुच्छेद 128

सर्वोच्च न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति



➨ अनुच्छेद 129

सर्वोच्च न्यायालय रिकॉर्ड की अदालत हो


➨ अनुच्छेद 130

सुप्रीम कोर्ट की सीट


➨ अनुच्छेद 131

सर्वोच्च न्यायालय का मूल क्षेत्राधिकार


➨ अनुच्छेद 131 ए

केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक वैधता (निरस्त) के रूप में सवालों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का विशेष अधिकार क्षेत्र


➨ अनुच्छेद 132

कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से अपील में सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार



➨ अनुच्छेद 133

सिविल मामलों के संबंध में उच्च न्यायालयों से अपील में सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार


➨ अनुच्छेद 134

आपराधिक मामलों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार


➨ अनुच्छेद 134 ए

सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए प्रमाण पत्र


➨ अनुच्छेद 135

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मौजूदा कानून के तहत संघीय कानून के क्षेत्राधिकार और शक्तियां


➨ अनुच्छेद 136

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपील करने के लिए विशेष अवकाश



➨ अनुच्छेद 137

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णयों या आदेशों की समीक्षा


➨ अनुच्छेद 138

सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि


➨ अनुच्छेद 139

कुछ रिट्स जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ पॉवर पर कन्वेंशन


➨ अनुच्छेद 139 ए

कुछ मामलों का स्थानांतरण


➨ अनुच्छेद 140

सर्वोच्च न्यायालय की सहायक शक्तियाँ



अनुच्छेद 141

सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून सभी अदालतों पर बाध्यकारी है


➨ अनुच्छेद 142

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और आदेशों की प्रवर्तन और खोज आदि के आदेश।


➨ अनुच्छेद 143

सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति


➨ अनुच्छेद 144

सुप्रीम कोर्ट की सहायता में कार्य करने के लिए नागरिक और न्यायिक अधिकारी



➨ अनुच्छेद 144 ए

कानूनों की संवैधानिक वैधता से संबंधित सवालों के निपटान के लिए विशेष प्रावधान (निरस्त)


➨ अनुच्छेद 145

अदालत के नियम, आदि।


➨ अनुच्छेद 146

अधिकारी और नौकर और सर्वोच्च न्यायालय का खर्च


➨ अनुच्छेद 147

व्याख्या

AvdHesH MeEnA

अभ्यास दोस्ती-17: हिंद महासागर में भारत, श्रीलंका और मालदीव की 'त्रिशक्ति', जानिए मुख्य विशेषताएं

    अभ्यास दोस्ती-17: हिंद महासागर में भारत, श्रीलंका और मालदीव की 'त्रिशक्ति', जानिए मुख्य विशेषताएं हिंद महासागर में रणनीतिक सुरक्...